चारधाम यात्रा 2026 में हेलीकॉप्टर नियमों में क्या बदलाव हुए? DGCA के नए सख्त निर्देश जानें
भारत के उत्तराखंड राज्य में आने वाले 19 अप्रैल 2026 माह से शुरू होगी चारधाम की यात्रा। इस बार की यात्रा को और सुरक्षित बनाने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सूरज निकलने के पहले और सूरज डूबने के बाद कोई भी हेलीकॉप्टर आसमान में नहीं उड़ सकता।
भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में चारधाम का विशेष महत्व है। हर साल बहुत बड़ी संख्या में आस्थावान लोग यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे पवित्र मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं। इनके अलावा हेमकुंड साहिब भी लाखों सिख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ज्यादातर लोग पैदल चलकर और सड़क के रास्ते से ये यात्रा पूरी करते हैं। साथ ही, एक बड़ी तादाद में यात्री हवाई सेवा का फायदा उठाते हैं। लेकिन पिछले साल कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटीं जिन्होंने इन हवाई सेवाओं की सुरक्षा के बारे में गंभीर सवाल उठा दिए। अब नई योजना और सख्त नियमों के साथ अगली यात्रा शुरू होगी।
साल 2025 में दुर्घटनाओं की एक दर्दनाक श्रृंखला देखी गई। कुल मिलाकर पांच बड़ी घटनाएं हुईं। केदारनाथ के इलाके और उत्तरकाशी जिले में दो बेहद गंभीर दुर्घटनाएं घटीं जिनमें कुल 13 लोग अपनी जीवन खो गए। इसके अलावा तीन अन्य हेलीकॉप्टर भी आपातकालीन परिस्थितियों में जमीन पर उतरे थे। इन सभी घटनाओं को सबक मानते हुए नागरिक उड्डयन विभाग ने तुरंत कदम उठाए। उन्होंने हेली सेवाएं रोक दीं और सभी हेलीकॉप्टर संचालकों को कठोर दिशा-निर्देश और नई कार्यप्रणाली का पालन करने का आदेश दिया।अनुभवी पायलटों की तैनाती अनिवार्य
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि केवल ऐसे पायलट ही उड़ान भर सकेंगे जिनके पास हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में उड़ान का गहन प्रशिक्षण और लंबा कार्य अनुभव हो। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय उड़ान पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह कदम इसलिए जरूरी था क्योंकि केदारनाथ वाले इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद जटिल हैं और यहां मौसम अचानक बदल सकता है। विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार केदारनाथ घाटी की उड़ानों में 30 फीसदी की कटौती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए देहरादून शहर के पास स्थित सहस्रधारा और सिरसी नामक हेलीपैड पर अत्यधुनिक हवाई यातायात नियंत्रण कक्ष और मौसम विज्ञान की विशेषज्ञ टीमें तैनात की गई हैं।
शटल और चार्टर सेवाओं में भी 30 प्रतिशत की कमी
निगरानी और सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए केदारनाथ घाटी के तीनों महत्वपूर्ण स्थानों लिनचोली, भीमबली तथा गौरीकुंड पर भूमि पर निरीक्षण और निगरानी के लिए कर्मचारी तैनात किए गए हैं। अत्याधुनिक प्रযुक्ति का उपयोग करते हुए सहस्रधारा, गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा जैसे मुख्य हेलीपैड्स पर 30 से ज्यादा शक्तिशाली निगरानी कैमरे लगाए गए हैं जो पैन, टिल्ट और जूम कर सकते हैं।
केदारघाटी में जो शटल (नियमित) और चार्टर (किराए की) हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं उनमें भी 30 फीसदी की कमी लाई गई है। इससे आसमान में यातायात को नियंत्रित रखा जा सकेगा और सुरक्षा बढ़ेगी। उत्तराखंड सरकार की नागरिक विमान विकास संस्था अब इन नए मानदंडों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों के आधार पर आने वाले सीजन के लिए ठेकेदारों का चयन कर रही है। इस पूरी कवायद का मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर यात्री सुरक्षित रहे, सब कुछ व्यवस्थित हो और सेवाएं सर्वोच्च गुणवत्ता की हों।
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